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ठंड के मौसम में अपने हक पाने की कोशिश करते हुए ये किसान अपनी हर चीज़ दांव पर लगाने को तैयार हैं।

अपने सपने, अपनी खुशियां और यहां तक कि, अपनी जान भी। लेकिन जिस चीज़ से वो बिलकुल समझौता नहीं कर सकते वो है अपने अपनों के सपने, अपने बच्चों का बचपन, उनकी भूख और उनकी शिक्षा।

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किसानों का तर्क ये है कि ये सब उन्हें तभी मिल पाएगा जब सरकार इन काले कानूनों को वापस लेगी। अब आपको हम सरकार का तर्क भी बता दें। आखिर दोनों पक्षों को आपके सामने लाना जरूरी है न। 
इस मसले पर भरतीय जनता पार्टी की सरकार अपना ही राग अलाप रही है। आखिर अलापे भी क्यों ना। अब भई, कोई भला अपनी चीज़ को खराब कहता है? ये कानून कितने अच्छे हैं और कितने खराब इसका फैसला हम आप पर छोड़ते हैं। हमें कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर बताइएगा।

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सरकार का तर्क ये है कि ये कानून बिलकुल किसान हितैशी हैं। इससे किसानों की आए दोगुनी होगी। इन तीन कृषि कानूनों को लेकर किसानों के गुस्से का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है।

मंगलवार को जो हरियाणा के सी एम मनोहर लाल खट्टर के साथ हुआ उसकी कल्पना तक खट्टर साहब ने सपने में भी नहीं की होगी। किसानों ने उन्हें दिन में ही तारे दिखा दिए।

दरअसल, किसानों ने मंगलवार को मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के काफिले पर हमला कर दिया। उन्हें काले झंडे दिखाए गए। किसान यहीं तक नहीं रुके। उन्होंने डंडे से वार करके सी एम के काफिले की गाड़ियों तक को नुकसान पहुंचाया।

जैसे महाभारत में अभिमन्यू को मारने के लिए चक्रव्यूह रचा गया था, ठीक वैसा ही घेरा पुलिस कर्मियों ने सी एम साहब के लिए बनाया था।

मगर ये चक्रव्यूह उन्हें मारने के लिए नहीं बल्कि किसानों के गुस्से से उन्हें सुरक्षित रखने के लिए था।
हालांकि आला अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया लेकिन वो नहीं माने और काले झंडे लेकर सी एम के काफिले की ओर बढ़ चले जिन्हें बड़ी मुश्किल से पुलिस ने रोका।

आपको बता दें कि मंगलवार को मुख्यमंत्री मनोहर लाल जनसभाएं कर रहे थे। उनकी पहली सभा अम्बाला के अग्रसेन चौक पर एक निजी पैलेस में थी।

किसान नेता मंगलवार को यूनियन के नेता व काफी लोग अनाज मंडी में जुटे थे। सूचना मिली थी, कि ये लोग सी एम और अन्य वीआईपियों को नुकसान पहुंचाने के इरादे से यहां इकट््ठा हुए हैं। सी एम की सुरक्षा में तैनात पुलिस कर्मियों ने खतरे को भांपते हुए एलान किया कि सभी किसान शांतिपूवर्क विरोध जताएं।

लेकिन प्रदर्शन में शामिल उपद्रवियों ने पुलिस कर्मियों की एक न सुनी और काले झंडे लेकर अग्रसेन चौक पहुंच गए।

उस समय तो उन्हें समझा बुझा कर शांत कर दिया गया लेकिन देर रात उन प्रदर्शनकारियों में से 13 पर हत्या की कोशिश का आरोप लगाते हुए सिक्योरिटी एजेंट ने केस दर्ज करा दिया।

इसके अलावा अन्य 9 धाराओं के तहत भी उन पर केस दर्ज किया गया है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस मामले में 13 लोगों को नामजद किया गया है। इस पूरी घटना ने प्रशासन के हाथ पांव फुला दिए।

आपको बता दें कि इस घटना के दो दिन पहले अनाज मंडी में केंद्रीय राज्य मंत्री रत्नलाल कटारिया को भी किसानों ने इसी तरह काले झंडे दिखाए थे। उसी समय इस हमले की रणनीति बना ली गई थी। इसकी रिपोर्ट सीआईडी ने दो दिन पहले भेज दी थी।
ये आंदोलन कब खत्म होगा ये एक ‘यक्ष’ प्रश्न बन कर रह गया है। आपकी इस बारे में क्या राय है हमें कमेंट करके जरूर बताएं।
किसानों के आंदोलन से जुड़ी हर अपडेट हम आपको देते रहेंगे। बने रहें हरियाणा मीडिया न्यूज़ के साथ।

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