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किसान आंदोलन आज के दौर में एक बहुत बड़ा राजनीतिक अखाड़ा बन गया है। आपने अकसर देखा होगा कि जब भी कहीं कुश्ति होती है तो सभी पहलवान कुश्ति करने से पहले खूब तैयारी करते हैं। कुश्ति के हर दांव पेंच को आज़माते हैं। कसरत करके अपने आप को कुश्ति लड़ने के लिए तैयार करते हैं।

इन शॉट अगर आसान भाषा में, एक शब्द में बात कहें तो ये पहलवान होमवर्क करते हैं। लेकिन आश्चर्य होता है ये जानकर कि देश की राजनीति का इतना बड़ा हिस्सा यानि कि कांग्रेस पार्टी जिसने इतने साल राज किया, उस पार्टी के नेता कभी भी होमवर्क करते ही नहीं हैं। वैसे ये हम यू ही नहीं कह रहे। आप भी कहेंगे कि ये तो यूं ही चपर चपर करते रहते हैं।

ना जी, हम ऐसे ही थोड़ी कह रहे हैं। हमें तो ये कहने पर मजबूर किया गया है। हा हा हा, वो गाना है न मैं पीता नहीं हूं, पिलाई गई है। ठीक उसी तरह। खैर। तो हम बात कर रहे थे होमवर्क की। आपको पता है फ्रेंड्स, अभी कुछ ही घंटों पहले, कांग्रेस के पॉपुलर लीडर व राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सिंह सुर्जेवाला ने अपने एक ट्विटर हैंडल पर एक ट्वीट किया है।

श्श्श्श्। किसी को बताना मत। सिर्फ आपके लिए ये खबर लेकर आए हैं हम। ओके। दरअसल वो क्यो है न, किसानों का ये जो भी मैटर चल रहा है कांग्रेस न इसपर पूरा फोकस कर रही है। फोकस करे भी क्यों न? इसी से तो इन्हें एक मुद्दा मिलता है न सत्ता में फिर से सत्ता में आने का मौका मिलता है। (कॉमेडी अंदाज़ में बोलना है।) किसानों के समर्थन में उतरी कांग्रेस ने अपना पक्ष रखने कई बार रणदीप सिंह सुरजेवाला कैमरे के सामने खूब सज संवर का आए हैं। हा हा हा।

तो इस बार भला वो कैसे पीछे रहते। सुरजेवाला ने एक टीवी चैनल के इंटरव्यू में एक सवाल पूछा। बस इसी से समझ जाइए कि कांग्रेस के किसी भी नेता की दिमाग की बत्ती या फिर ऐसे समझिए कि इन नेताओं के दिमाग का जो इस्करू है ना, वो ढीला हुई गवा है। अब बताइए, ई काउन सा सवाल हुआ भला। सुरजेवाला कह रहे हैं कि जब मंडी व्यवस्था सरकार खत्म कर देगी तो एमएसपी यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य या अंग्रेजी में कहिन तो मिनिमम सपोर्ट प्राइस क्या सरकार किसानों को खेतों में जाकर देगी? अब इनको कौन समझाए यार कि एक रफ़पये में एक मीठी गोली आती है मिंटौस, उसको खा लीजिए और अपने दिमाग की जो बत्ती है न वो जला लीजिए।

चलिए ये भी नहीं कर सकते तो एक और काम कीजिए सुरजेवाला बाबू, हमारा चैनल ही देख लिया करो उसी से आपके ज्ञान की जो बैटरी खत्म हो गई है वो कुछ तो चार्ज होगी। मतलब बताईए, ऐसा सवाल तो कोई छोटा बच्चा भी न करे। अपने दिमाग के घोड़े दौड़ाइए सुरजेवाला जी और ये बताइए कि जब आप जी ने ही सब कुछ डिजिटल कर रखा है। बैंकिंग भी ऑनलाइन हो रही है तो ये तो जाहिर सी बात है जनाब कि सरकार डिजिटल माध्यम से किसानों के खाते में सीधा पैसे डालेगी।

वो भला किसानों के खेतों में एटेंडेंस लगवाने क्यों जाएगी। हां नई तो। माना आपने ये घुट्टी पी रखी है कि कांग्रेस को किसी भी तरह सत्ता में वापस लेकर आना है, पर इस तरह के सवाल पूछकर न बाईगॉड आपने तो हमें बचपन की याद दिला दी। भाई साहब, जब डिजिटल फंडे से सरकार आपके खाते में सिलेंडर की सब्सिडी दे सकती है, पैंशन के माध्यम से हरी हरी नोटों की गड्यिां आपके खातों में मिलती है। तो भइया जी सवाल तो ढंग से पूछ लिया करो जी। जैसे बचपन में हम बिना सोचे समझे किसी को भी कुछ भी कह देते थे वो ही आज आपने किया। चलो कोई नी, थोड़ी सी हमसे ट्यूशन ले लेना ओके। टा—-टा।

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