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केंद्र की भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने जो तीन कृषि कानून बनाए हैं उसे वापस लेने की मांग के साथ दिल्ली की सीमाओं पर आज 12वें दिन डटे किसान अपना आंदोलन उतने ही जोश के साथ जारी रखे हुए हैं जितना कि जोश और उससे भी बढ़कर रोष इन किसानों के दिलों में पहले दिन देखा गया था। इस आंदोलन को पंजाब-हरियाणा के लेकर विदेशों तक से समर्थन मिल रहा है।

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सभी खाप पंचायतों ने केंद्र सरकार के ऐसे मंत्रियों और विधायकों जो किसान के बेटे हैं या खुद किसानी से कीसी न किसी तौर पर जुड़े हुए हैं उनसे अपील की है कि वो ऐसी सरकार से अपना समर्थन वापस ले लें जो किसानों की आह न सुन सकती हो। जो किसानों का दर्द न महसूस कर सकती हो। किसानों का मानना है कि अपना बोरिया बिस्तरा लेकर सड़क पर गुजर बसर करने को मजबूर जिस किसान को इस सरकार ने कर दिया हो उसे सत्ता में बने रहने का कोई अधिकार नहीं है।

पूदे देश का पेट पालने वाले किसान को अन्नदाता कहा जाता है। अन्न दाता यानि जो सबको अन्न देने वाला है। ऐसे में अगर वही किसान अपना ही पेट अन्न से न भर पाए तो लानत है ऐसी सरकार को। ऐसा क्याें होता है कि किसान अपना पेट नहीं पाल पाता? क्योंकि जब दिन भर धूप में मेहनत मजदूरी कर के कोई किसान अपनी फसल के रूप में मोती लेकर सरकार के द्वार पहुंचता है तो उसे उस फसल की सही कीमत नहीं मिल पाती जिसका वो हकदार होता है।

अगर खुदा न खास्ता उसे सही कीमत मिलने का ऐलान हो भी जाता है तो दलाल अपनी दलाली उनसे वसूल कर लेते हैं और किसान अपनी मजबूदी की चादर ओढ़े निराश होकर घर की ओर कदम बढ़ाने लगता है। इन दिनों जो किसान आंदोलन चल रहा है उसने भाजपा सरकार की नींद उड़ा दी है। अब इस आंदोलन में एक नया मोड़ आ गया है। पंजाब के खिलाड़ी और कलाकारों ने ऐलान किया है कि वे सभी इस सरकार द्वारा दिया हुआ सम्मान जो उन्हें अवॉर्ड के रूप में मिला है उसे वापस लौटाएंगे। इसके साथ ही खबर ये भी पक्की है कि आज किसानों से मिलने और उनकी समस्याएं जानने आम आदमी पार्टी के कर्ता धर्ता और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सिंधु बॉर्डर जा रहे हैं।

अब तक जिन खिलाड़ियों ने अवॉर्ड लौटाने का एलान किया है उनमें शामिल हैं बॉक्सिंग चैम्पियन विजेंद्र सिंह, जिन्हें खेल रत्न अवार्ड मिला है। इसके अलावा बॉक्सिंग के लिए ही द्रोणाचार्य अवॉर्ड पाने वाले गुरबख्श सिंह संधू भी अपना अवॉर्ड लौटाएंगे। कुश्ती के माहिर खिलाड़ी और पद्मश्री तथा अर्जुन अवॉर्ड पाने वाले करतार सिंह, बास्केट बॉल में अर्जुन अवॉर्ड पाने वाले सज्जन सिंह चीमा, हौकी में अर्जुन अवॉर्ड पाने वाली खिलाड़ी राजबीर कौर भी अवॉर्ड लौटाने वालों की लिस्ट में शामिल हैं।

बंद के दौरान एम्बुलेंस और शादियों वाली गाड़ियां आ-जा सकेंगी
अपनी मांगों को मनवाने के लिए और सरकार को झुकाने के लिए किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी (Gurnam Singh Chadhuni) की अपील पर किसानों और अन्य संगठनों ने आठ दिसम्बर को भारत बंद का ऐलान किया है। किसान पहले ही कह चुके हैं कि आठ दिसम्बर दिन मंगलवार को हर हाल में भारत बंद हो कर रहेगा।

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बंद के समर्थन में और अपनी राजनीतिक गोटी फिट करने की जुगत में कांग्रेस भी मैदान में आ गई है। इसके अलावा भारत बंद को सफल बनाने के लिए 20 सियासी दल और 10 ट्रेड यूनियंस उतर आए हैं। सभी विपक्षी दल 9 दिसम्बर को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात करेंगे। इसके लिए उन्होंने समय मांगा है। वो कहते हैं न, देर आए मगर दुरफ़स्त आए। तो इसी तर्ज पर अब बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी किसानों को समर्थन देने का एलान कर दिया है। उधर, एक किसान नेता ने बताया कि मंगलवार को बंद सुबह से शाम तक रहेगा। उन्होंने कहा कि चक्का जाम दोपहर तीन बजे तक रहेगा। इस दौरान एम्बुलेंस और शादी की गाड़ियां आसानी से आ जा सकेंगी।

किसानों का अगला टारगेट- बदरपुर बॉर्डर
किसानों और सरकार के बीच हुई 5 दौर की बातचीत में कोई नतीजा निकल कर सामने नहीं आया। अपनी मांगों को लेकर किसान दिल्ली के कई बॉर्डरों पर डेरा डाले हुए हैं। आठ दिस्म्बर को भारत बंद का एलान तक कर चुके हैं। अब किसानों का अगला टार्गेट होगा बदरपुर बॉर्डर। अगर ये बॉर्डर भी किसानों ने रोक दिया तो दिल्ली आने जाने वालों की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। जो जहां है वहीं रह जाएगा। इस बॉर्डर के सील होते ही दिल्ली में एंट्री करना तो भूल ही जाइए।

दिल्ली चारों तरफ से किसानों के घेरे में आ जाएगी। अब इसे लेकर पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां भी हरकत में आ गई हैं। पुलिस भी अपने स्तर पर किसानों की स्ट्रैटेजी पता लगाने की कोशिश में लगी हुई है। इस आंदोलन में एक खास बात देखने को मिली है। आंदोलन में बच्चों और महिलाओं से लेकर बुजुर्ग तक शामिल हैं। आंदोलन में अपनी भूमिका पर बात करने के लिए महिलाएं मोबाइल एप के जरिए मीटिंग करती नजर आ रही हैं। करीब 70 वर्ष के एक बुजुर्ग कहते हैं कि पंजाब बड़ा भाई और हरियाणा छोटा है, दोनों साथ हैं तो सबक सिखा ही देंगे। एक और बुजुर्ग ने कहा कि जोश के साथ होश भी जरूरी है। ये भविष्य की लड़ाई है, सब्र से लड़ी जाएगी।

कृषि राज्य मंत्री बोले – कानून वापसी की जरूरत नहीं, संशोधन कर सकते हैं
केंद्रीय क ृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी ने कहा कि ‘मैं नहीं मानता असली किसान जो अपने खेतों में काम कर रहे हैं वो इस बारे में चिंतित हैं। कुछ राजनीतिक लोग आग में घी डाल रहे हैं। मुझे नहीं लगता कानून वापस लिए जाने चाहिए। जरूरत पड़ी तो इनमें कुछ संशोधन हो सकते हैं।’

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