नहीं रहे मसालों के बादशाह धर्मपाल गुलाटी
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यही है असली इंडिया। इस नारे को सुनकर जो एक नाम हम सबके माइंड में आता है वो है एमडीएच मसाले। कोई भी न्यूज़ चैनल हो, टीवी का कोई पॉपुलर शो हो, उसमें ऐसा कोई दिन नहीं रहता है जब एमडीएच मसाले का विज्ञापन न दिखाया जाए। आज हम जो खबर आपको सुनाने जा रहे हैं वो बेहद दुखद है।

जिस शख्स के मसाले अपने स्वाद के लिए देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी जाने जाते थे वो शख्स थे महाशय धरमपाल गुलाटी जो आब हमारे बीच नहीं रहे। कहा जा रहा है कि उन्होंने दिल्ली के तीन दिसम्बर को दिल्ली के माता चंदन देवी अस्पताल में सुबह छह बजे अंतिम सांस ली। वे 98 वर्ष के थे। बताया जा रहा है कि वे हाल ही में कोरोना पॉसिटिव हुए थे। हालांकि उन्होंने कोरोना से जंग जीत ली थी। ऐसा माना जा रहा है कि धर्मपाल का निधन हार्ट अटैक से हुआ है।

धर्मपाल गुलाटी एमडीएच के हर विज्ञापन में दिखाई देते थे। गुलाटी बड़े पर्दे पर कोई सिलेब्रिटी नहीं थे न ही उनकी किसी को पहचान थी। मगर असल जि़ंदगी में वो किसी सिलेब्रिटी से कम नहीं थे। महाशय धर्मपाल गुलाटी को मसालों की दुनिया का किंग कहा जाता था। दुनिया का शायद ही कोई ऐसा घर होगा जिसमें एमडीएच मसालों की खुशबू न पहुंची होगी। हर घर में ये मसाले इस्तेमाल होते हैं और जब मेहमान आते हैं तो वो उंगलियां चाटते रह जाते हैं। चलिए जानते है मसालों के इस बेताज बादशाह की सफलता की कहानी।

27 मार्च 1923 को पाकिस्तान के सियालकोट में धर्मपाल गुलाटी का जन्म हुआ था जो बटवारे के बाद भारत आ गए थे। वे भारत के एक बहुत बड़े मसाला व्यापारी थे। हालांकि शुरिवाती दौर में इनका बहुत ही संघर्षपूर्ण जीवन रहा। इन्होंने शुरूआत में एक तांगा भी खरीदा था जिसपर वो सवारियां ढोकर एक स्थान से दूसरे स्थान तक सवारियों को छोड़ने का काम करते थे। इनके पिता चुन्नीलाल गुलाटी चाहते थे कि वे खूब पढे़ं और अपने पैरों पर खड़े हों।

धर्मपाल गुलाटी के बारे में एक खास बात ये है कि उन्हें पढ़ने लिखने में जरा भी रूचि नहीं थी। गुलाटी मात्र पांचवीं पास हैं। पांचवीं कक्षा के बाद उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी थी। पिता की इच्छा तो पूरी नहीं हो पाई मगर उन्होंने अपने बेटे धर्मपाल को एक बढ़ई की दुकान पर काम सीखने के लिए लगा दिया। लेकिन गुलाटी वहां से भी काम छोड़कर आ गए। उनका वहां मन नहीं लगा।

इसके बाद उनके पिता ने महाशय दी हट्टी के नाम से दिल्ली के करोल बाग में एक मसाले की दुकान खुलवा दी। कहते हैं ईश्वर जब भी देता है छप्पर फाड़ कर देता है। गुलाटी ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि उनका मसाले का कारोबार इतना अच्छा चल पड़ेगा। मसालों का व्यापार इतनी तेजी से फैला कि आज दुबई समेत उनके 98 फैक्ट्रियां हैं। धर्मपाल ने एमडीएच कम्पनी की शुरूआत शहर में एक छोटी सी दुकान से की थी जो आज एक बहुत बड़ी कम्पनी का रूप ले चुकी है।

धर्मपाल गुलाटी के बारे में एक खास बात जो आप नहीं जानते होंगे। वो ये है दोस्तों कि इन्होंने केवल मसालों के क्षेत्र में ही अपनी पहचान नहीं बनाई थी बल्कि ये एक समाजसेवी भी थे। इन्होंने लोगों की सेवा के लिए अपना सारा जीवन समर्पित कर दिया। यही वजह है कि वर्ष 2019 में उन्हें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पद्मविभूषण से सम्मानित किया था।

वे अपने क्षेत्र के माहिर इंसान थे। साथ ही उन्होंने कभी भी अपनी एड्स को प्रमोट करने के लिए किसी बड़े एक्टर का सहारा नहीं लिया। उनका मानना था कि वो अपनी मसालों की एड के लिए खुद ही रोल मॉडल बनेंगे। एक इंटरव्यू में उनकी सेहत का राज़ पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वे रोज़ना सेहत मंद खाना खाते हैं और व्यायाम करते हैं इसलिए वे हमेशा फिट रहते थे।

ट्विटर पर इस महान विभूति को श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लग गया है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरिविंद केजरीवाल और उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भी उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए ट्वीट किया है। मनीष सिसोदिया ने कहा कि वह एक प्रेरणा देने वाले कारोबारी थे।

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