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हैलो, वैल्कम एंड गुडमॉर्निंग फ्रेंड्स। आपको ताज़ा खबरों की घुट्टी पिलाने हम फिर से हाजि़र हैं आपके बीच। अपनी खबर की पोटली से हम आज जो खबर निकाल कर लाए हैं वो है ड्राइंग टीचर्स की। चलिए आपको बताते हैं क्या है पूरी खबर। लास्ट तक देखिए इस वीडियो को।
कांग्रेस के कार्यकाल में भर्ती 816 ड्राइंग टीचर्स के लिए ये खबर अच्छी नहीं है। इन ड्राइंग टीचर्स पर गिरने वाली है गाज। इन टीचर्स को नौकरी से निकालने की पूरी तैयारी हो चुकी है।

दरअसल ये मामला है वर्ष 2006 का जब विज्ञापन जारी किया गया कि ड्राइंग टीचर्स की भर्ती होनी है। ये भर्ती प्रक्रिया वर्ष 2008 तक चली। जिन लकी टीचर्स को सरकार द्वारा चयनित किया गया उन्हें वर्ष 2010 में ज्वाइनिंग दी गई। कुछ लोगों और पार्टियों ने आरोप लगाया कि भर्ति प्रक्रिया में अनियमित्ता बरती गई है।

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सुप्रीम कोर्ट में इनकी याचिका खारिज कर दी गई। इसके बाद मौलिक शिक्षा विभाग के महानिदेशक ने सभी जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों से इनकी रिपोर्ट मांग ली है। आपको बता दें कि एक वर्ष के अंदर भूपेंद्र सिंह हुड्डा सरकार की ये दूसरी भर्ती है जिसे रद्द किया जा सकता है और वर्षों से नौकरी कर रहे कर्मचारियों को घर भेजा जा सकता है।

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आपको बता दें कि इससे पहले भी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा द्वारा भर्ती किए गए 1983 पीटीआई टीचर्स पर भी गाज गिर चुकी है और उनकी छुट्टी की जा चुकी है। हालांकि उन्हें 25 हजार रुपए मासिक के आधार पर वालिंटियर के आधार पर रखा जा रहा है। ऐसे में यह भी कयास लगाया जा रहा है कि इन ड्राइंग टीचरों की भी इनकी तर्ज पर सरकार एडजस्ट कर सकती है।

ड्राइंग टीचर हाई कोर्ट की सिंगल बेंच के बाद डबल बेंच में गए थे। परंतु वहां भी वे केस हार गए। इसके बाद देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिली। अब विभाग जल्द ही इन्हें नौकरी से बर्खास्त करेगा। क्योंकि महानिदेशक ने सभी जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि 21 दिसंबर की दोपहर 2 बजे तक इनकी सूचना अनिवार्य रूप से भिजवा दें। इसके लिए 19 व 20 दिसंबर को शनिवार व रविवार का अवकाश होने पर भी कार्यालय खोलकर काम किया जाए।

यह है पूरा मामला
1983 पीटीआई के साथ ही 2006 में 816 ड्राइंग टीचरों की भर्ती का विज्ञापन निकाला गया था। चयन समिति ने इंटरव्यू का 30 अंक तय किया।
2007 में पीटीआई के साथ उनकी भर्ती के लिए एक नोटिस जारी किया कि उनका पेपर व इंटरव्यू होगा।
इसके सात दिन बाद ही यह नोटिस जारी किया कि ड्राइंग टीचर का पेपर नहीं होगा।
भर्ती प्रक्रिया के दौरान बार-बार नियम बदलने के अरोप लगे।

2010 में सभी चयनितों की जॉइनिंग हो गई। उस वक्त 24 कैटेगिरी की भर्ती निकाली गई थीए जिसमें पीटीआई भर्ती केस के साथ ड्राइंग टीचर भर्ती का केस भी जुड़ गया।
मामले को लेकर ड्राइंग टीचर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचे लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली।

हमारा कोई कसूर नहीं : ड्राइंग टीचर एसोसिएशन
ड्राइंग टीचर एसोसिएशन के राज्य प्रधान पवन कुमार का कहना है कि उनकी भर्ती भी 24 में से बाकी 23 कैटेगिरी के नियमों के अनुसार हुई है। जबकि पीटीआई की भर्ती के नियम अलग थे। लेकिन उनकी भर्ती को पीटीआई केस के साथ जोड़ दिया। अभी हम मंत्री से लेकर एमएलए तक से मिल रहें हैं। 816 परिवार हैं। सरकार नौकरी को जारी रखे। हमारा कोई कसूर नहीं है।

हालांकि उन्हें 25 हजार रुपए मासिक के आधार पर वालिंटियर के आधार पर रखा जा रहा है। ऐसे में यह भी कयास लगाया जा रहा है कि इन ड्राइंग टीचरों की भी इनकी तर्ज पर सरकार एडजस्ट कर सकती है।

ड्राइंग टीचर हाई कोर्ट की सिंगल बेंच के बाद डबल बेंच में गए थे। परंतु वहां भी वे केस हार गए। इसके बाद देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिली। अब विभाग जल्द ही इन्हें नौकरी से बर्खास्त करेगा। क्योंकि महानिदेशक ने सभी जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि 21 दिसंबर की दोपहर 2 बजे तक इनकी सूचना अनिवार्य रूप से भिजवा दें। इसके लिए 19 व 20 दिसंबर को शनिवार व रविवार का अवकाश होने पर भी कार्यालय खोलकर काम किया जाए।

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