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राम राम जी। कैसे हैं आप सब। हमारा वेट कर रहे थे ना। लो हम हाजिर हो गए आपके लिए ग्या———न का पिटारा खोलने। वैसे हम तो इतनी मेहनत केवल और केवल आप के लिए ही करते हैं और वो भी फ्री फ्री फ्री। चलिए फटाफट से आपको बताते हैं कि आज हम आपके लिए कौन से इंटरस्टिंग फैक्स लेकर आए हैं अपने पिटारे में से। हम्म्म्म् तो हो जाइए तैयार—-दिल थाम लो मेरे यार—।

फ्रैंड्स अगर हम आपको ऑपशन दें कि आपको एजुकेशन चाहिए या पैसा। आपके पास 10 सेकेंड्स हैं अपना जवाब हमें कमेंट बॉक्स में बताएं। हां चलो समय समाप्त। अब कोई मत लिखना। नो चीटिंग। हा हा हा। हमें पता है कि आपमें से ज्यादातर दोस्तों का जो जवाब है न वो है जी पैसा। कुछ लोगों ने एडुकेशन को चूज़ किया होगा। वैसे आपको बता दें, चाणक्य हम सब के रोल मॉडल हैं। जो स्ट्रैटेजी उन्होंने दी है मजाल है उसे कोई गलत साबित कर दे।

चाणक्य अगर हमारे ऑपशन सुन रहे होते तो गैरंटीड वो एडुकेशन को चुनते। एक बात बताउं, किसी को बताना मत। हमारे डिटेक्टिव माइंड ने न एक रिसर्च की है जिससे पता चला है कि आचार्य चाणक्य किताबी कीड़ा थे। तभी तो वो इतने धनवान थे। आप भी कहोगो न कि हम तो बुद्धू बना रहे हैं वो तो धोती कुर्ता पहनते थे कुटिया में रहते थे। दरअसल यार चाणक्य इस बात पर बिलीव करते थे कि जिसके पास धन नहीं है वो सबसे ज्यादा रहीस है अगर उसके पास विद्या यानी एडुकेशन है। अगर कोई ऐसा परसन है जिसके पास धन तो इतना है कि दोनों हाथों से लुटाए तब भी काफी धन बच जाए लेकिन अगर उसके पास एडुकेशन ही सबसे बड़ा धन है। ये तो हुई एक बात।

अब आते हैं दूसरी बात पर। चाणक्य ने ये फिलौसोफी दी है कि हमें अपना हर कदम फूंक फूंक कर रखना चाहिए। अब ये न समझिएगा जनाब कि जहां हम पैर रखेंगे वो जमीन गरम है इसलिए ऐसा कहा। हा हा हा हा। इसका मतबल ई है दोस्तों कि वो कहत रहिन कि हमें हर काम को सोच समझ कर करना चाहिए। हर बात को बोलने से पहले सोचना चाहिए कि हम क्या बोलत रहिन और कौन को बोलत रहिन।

अगर हमें कोई काम करना है तो ऐसा करना है जिसके बार में हमने सोच लिया हो कि इससे न तो हमारा और न ही दूसरों का कोई नुकसान होगा। दोस्तों अब आगे बढ़ने से पहले थोड़ा किटकैट ब्रेक तो बनता है न। फ्रेंड्स आप भी किटकैट ब्रेक लीजिए और एक छोटा सा काम है। करेंगे न आप? प्रोमिस मी। हा हा।

हमारी वीडियो को लाइक कर दो और चैनल को सब्सक्राइब करके ई बाजू वाला बैल दिख रहा है न, ओ हो, मेरा मतलब है बेल, इसपे क्लिक करके ऑल को सिलेक्ट करलो। है न फंटा——स्टिक आइडिया। चलो अब कहां थे हम। हम्म्म्म्। ज्ञा——न की दुनिया में। अब तीसरी बात पर आते हैं।

चाणक्य कहते हैं कि ये जो नीयति होती है न दोस्तों, यानि कि डेस्टिनी, यही डिसाइड करती है कि हम अपनी लाइफ में कैसे रहेंगे। लाइफ के मैदान में हम चौका मारेंगे या छक्का यानि कि अमीर होंगे या गरीब इसका फैसला यही अम्पायर के तौर पर करती है। इसी के पास लाइसेंस है कि ये किसी राजा तक को भिखारी बना दे और किसी भिखारी को चुटकी बजाते ही राजा बना दे। क्योें? है न कमाल।

इसके अलावा दोस्तों चाणक्य का ये मानना है कि एक अच्छा सलाहकार एक मूर्ख आदमी का शत्रु है। बात तो सच है जी। इंडिया में लोगों के पास एक चीज़ है जो वो हर किसी को देने लगते हैं लेकिन वो कभी खत्म ही नहीं होती। बोलो वो क्या है? जल्दी से कमेंट बॉक्स में लिखो। आपके पास 10 सेकेंड हैं। वो चीज़ है एडवाइस। हम हर किसी को एडवाइस का मीठा डोज़ यानी मीठी गोली देने से बाज नहीं आते। है न। लेकिन चाणक्य का कहना है कि अगर हम किसी बुद्धु को अपनी एडवाइस का इंजेक्शन देंगे तो उसपर इस बात का कोई इफेक्ट ही नहीं होगा। अगर हम बार बार ऐसा करेंगे तो हमारा ही टाइम वेस्ट होगा। इससे तो अच्छा है न दोस्तों कि हम ये ‘इंजेक्शन’ उसे लगाएं जो लगे कि हमारी बात मान लेगा।
तो फ्रेंड्स आज के लिए इतना ही। जल्द ही आपसे कुछ और आइडियाज़ के साथ मिलेंगे। टिल देन बाय बाय। सायो—–नारा।

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