Haryana Media
Ad


हरियाणा और पंजाब के किसानों ने अपने हक की लड़ाई लड़ने के लिए और उसमें जीत हासिल करने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिया है। लेकिन सरकार के कानों में जूं तक नहीं रेंग रही है। दिल्ली का टीकरी बॉर्डर किसानों के संर्घष की कहानी कह रहा है। एमएसपी यानी मार्किट सेलिंग प्राइज़ पर फसल खरीद और उससे कम की कीमत पर फसल खरीदने को अपराध की श्रेणी में लाने के लिए सरकार से किसान लगातार मांग कर रहे हैं।

भाजपा सरकार मौखिक तौर पर तो ये बात कहते नहीं थक रही है कि हम मंडी व्यवस्था को खत्म नहीं होने देंगे, एमएसपी जारी रहेगी, लेकिन इस बात को लिख कर देने के लिए बिलकुल भी तैयार नहीं है। चलिए आपको आज एक कहानी के द्वारा समझाने की कोशिश करते हैं कि आखिर माजरा क्या है? क्यों इतना हंगामा मचा हुआ है। आपने वो कहानी तो जरूर सुनी होगी कि एक बार एक व्यक्ति शोर मचाता है कि गांव में शेर आ गया है और उसे खाने वाला है।

तो सब उसकी बात पर विश्वास करके उसे बचाने आ जाते हैं लेकिन बाद में पता चलता है कि वो ऐसे ही कह रहा था। गांव में कोई शेर नहीं आया था। तीन चार बार ऐसा ही होता है। उसके बाद से गांव के लोग उस व्यक्ति की बातों पर विश्वास करना छोड़ देते हैं। लेकिन एक दिन सच में शेर उसकी ओर लपकता है।

वह व्यक्ति शोर मचाता है मगर इस बार उसे बचाने कोई नहीं आता। वो व्यक्ति शेर का शिकार बन जाता है। यही कहानी अब सरकार और किसानों के बीच की कड़ी बन गई है। सरकार ने किसानों से इतना झूठ बोला है, इतना छलावा किया है कि अब किसान भारतीय जनता पार्टी के नुमाइंदों की किसी भी बात में आने वाले नहीं हैं।

माफ कीजिए ऐसा हम नहीं कह रहे। बल्कि हरियाणा और पंजाब राज्य का वो अन्नदाता कह रहा है जो पूरे देश का पेट पालता है। किसान कह रहे हैं। किसानों को ये गारंटी चाहिए कि उनका परिवार भी तीन वक्त की रोटी खाए। उनके बच्चों को अच्छे स्कूल में पढ़ाने की गारंटी चाहिए। किसानों को अपने सपने पूरे होने की गारंटी चाहिए। किसानों का कहना है कि ये सारी गारंटी तब ही मिल पाएगी जब सरकार या तो इन तीनों कानूनों को तुरंत वापिस लें या फिर एक चौथा कानून लाए जिसमें ये गारंटी दे कि एमएसपी को खत्म नहीं किया जाएगा। इस बात को कांग्रेस के प्रमुख नेता और हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी कई बार अपने बयानों में कहा है।

किसानों के हक की लड़ाई के लिए भारतीय किसान यूनियन के प्रधान गुरनाम सिंह चढूनी ने अपनी आवाज़ बुलंद की हुई है। हाल ही में गुरनाम सिंह चढूनी का एक वीडियो सामने आया है। वीडियो में चढूनी ने कहा है कि अगर सरकार एमएसपी पर फसल खरीदने के लिए तैयार है तो देश के प्रधानमंत्री को ये बयान देना पड़ेगा कि फसलों का जितना भी देश में उतपादन होता है चाहे वो किसी भी प्रदेश में हो वो एमएसपी पर फसल खरीदने को तैयार हैं ताकि इस देश का किसान गुमराह न हो।

उन्होंने आगे अपने बयान में आरोप लगाया कि सरकार ये कह रही है कि भारतीय जनता पार्टी इस बात पर अड़ी हुई है कि हम कानूनों में संशोधन करने को तैयार हैं लेकिन किसान नहीं मान रहे हैं। भारतीय किसान यूनियन के प्रधान गुरनाम सिंह चढूनी ने इस बात पर ये स्पष्टिकरण दिया कि जो कोरोना काल में अध्यादेश लाए गए वो गलत कदम है सरकार का। उन्होंने कहा कि किसानों पर ऐसी कौन सी आफत आ रही थी कि जिसके कारण ये तीन अध्यादेश लागू किए गए। अध्यादेशों को केवल एमरजंसी के समय इस्तेमाल किया जाता है जब कानून बनाने का समय नहीं बचता।

सरकार ने जानबूझ के ये राजनीति खेली कि सरकार ने इसलिए कोरोना काल में अध्यादेशों को बनाया ताकि लोग आंदोलन न कर पाएं। लेकिन उसके बावजूद भी जब कड़ा आंदोलन हुआ तो सरकार ने जल्दबाजी में उन अध्यादेशों को कानून में बदलना चाहा और बहस पूरी न होने से पहले ही इन तीनों अध्यादेशों को कानून की शक्ल दे दी।

गुरनाम चढूनी से सवाल उठाया कि जब अध्यादेश के बाद कानून बनाया गया और कानून बनाने से पहले ही देश में किसानों ने बगावत शुरू कर दी तो उस वक्त सरकार ने किसानों को क्यों नहीं बुलाया और किसानों से बातचीत क्यों नहीं की। इसका मतलब है कि ये देश को गुमराह कर रहे हैं और देश को गुमराह करके पूरा एग्रो बिजनेस कॉरपोरेट के हाथों में बेचना चाहते हैं। अब ये देखना दिलचस्प होगा कि किसानों और सरकार की ये लड़ाई आखिर किस मोड़ पर आकर खत्म होगी।

Ad

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here