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किसान आंदोलन के चलते रेलवे ने पंजाब रूट की 4 ट्रेनें रद्द कीं
सिंघु बॉर्डर पर ड्यूटी देने वाले 2 पुलिस अफसरों को कोरोना हुआ

हे विधाता, क्यों परेशान है अन्नदाता।
कब इसका हल निकलेगा, समझ नहीं आता।।

आसमान में गूंजते नारे, रोड जाम, किसानों द्वारा सरकारी तंत्र के पुतले फूंकना। बस यही सब खबरें, पिछले काफी दिनों से अखबार और लगभग हर न्यूज़ चैनल की सुर्खियां बनी हुई हैं। जो किसान खेतों में हल चलाता है, अन्नदाता कहलाता है। आज वही किसान आज सत्ता के नशे में बेसुध हो चुके भारतीय जनता पार्टी की सरकार के नुमाइंदों को नींद से जगाने के लिए ये किसान अपनी एकता का परिचय देते हुए सड़कों पर उतर कर उन्हें नींद से जगाने का प्रयास कर रहे हैं।

नए कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले करीब 16 दिनों से हरियाणा और पंजाब के किसान आंदोलन कर रहे हैं। अभी तक कई बैठकें सरकार ने किसानों के साथ कर चुकी है। लेकिन सारी की सारी बैठकें किसानों के साथ एक छलावे से बढ़कर कुछ नहीं है। हर बैठक बेनतीजा निकल रही है। अब किसानों ने अपना हक पाने के लिए आगे की रणनीति तैयार कर ली है। किसान नेता ने कहा कि कानून रद्द करने को लेकर अभी तक कोई फैसला नहीं हुआए इसलिए जल्द ट्रेनें रोकने की तारीख का ऐलान करेंगे। एक अन्य किसान नेता ने बताया कि खेती राज्यों का विषय है, तो केंद्र इस पर कानून कैसे ला सकता है।

आंदोलन के बीच कोरोना का खतरा
किसान आंदोलन के बीच सिंघु बॉर्डर पर ड्यूटी देने वाले 2 IPS कोरोना पॉजिटिव आए हैं। इनमें एक DCP और एक एडिशनल DCP शामिल हैं।

रेलवे ने पंजाब जाने वाली 4 ट्रेनें रद्द कीं
किसान आंदोलन के चलते रेलवे ने ट्रेनें कैंसिल करने का फैसला लिया है। आज सियालदह-अमृतसर और डिब्रूगढ़-अमृतसर ट्रेनें रद्द की गई हैं। 13 दिसंबर को अमृतसर-सियालदह और अमृतसर-डिब्रूगढ़ ट्रेनें कैंसिल की गई हैं।

‘भगवन जाने कब हल निकलेगा’
एक और अन्नदाता से जब पूछा गया कि ये सब जो चल रहा है वो सब खत्म कब होगा। तो उन्होंने जवाब दिया कि ष्भगवान जाने कब ऐसा होगा। सर्दी और कोरोना के चलते हमें काफी दिक्कतें आ रही हैं, लेकिन मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखेंगे।
केंद्र ने किसानों को साफ संकेत दे दिए हैं कि कृषि कानूनों की वापसी मुश्किल है। अगर कोई चिंता है तो सरकार बातचीत और सुधार के लिए हमेशा तैयार है। कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि हमने किसानों से कई दौर की बातचीत की। उनके हर सवाल का जवाब लिखित में भी दियाए लेकिन किसान अभी फैसला नहीं कर पा रहे हैं और ये चिंता की बात है।

सरकार और किसान बातचीत को राजीए दोनों को पहल का इंतजार
दोनों पक्षों को एक-दूसरे की पहल का इंतजार है। कृषि मंत्री ने कहा कि जब बातचीत हो रही है तो आंदोलन को बढ़ाने का ऐलान ठीक नहीं। उधरए किसानों का कहना है कि बातचीत का रास्ता बंद नहीं किया हैए सरकार के दूसरे प्रपोजल पर विचार करेंगे।

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