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आचार्य चाणक्य को ही कौटिल्य, विष्णु गुप्त और वात्सायन कहते हैं। चाणक्य जैसे परम ज्ञानी और प्रकांड विद्वान युगों युगों में एक बार पैदा होते हैं। ये वही शख्स हैं जिन्होंने एक छोटे से बालक को अपनी नीतियों और कुशलताओं के बल पर इतना बड़ा और बलवान बना दिया कि जिनका दुनिया में नाम अमर हो गया। वो बालक था चंद्रगुप्तमौर्य। बाद में आचार्य चाणक्य मौर्य के प्रधानमंत्री भी बने।

अब जरा सोचिए ऐसे शख्स की नीतियों पर चलकर जिस चंद्रगुप्त ने इतना बड़ा साम्राज्य स्थापित किया और इतिहास के पन्नों में स्वर्णिम अक्षरों में अपना नाम दर्ज करवाया और अपने जीवन में सफल हुआ तो ऐसे शख्स की नीतियों का अनुसरण अगर आप कर लेंगे तो भला आपको सफल होने से कौन रोक सकता है। चलिए हम आपको आचार्य चाणक्य की नीतियों के बारे में बताते हैं जिन्हें जान कर आप एक मुख से हमारे लिए बस एक ही शब्द निकलेगा ‘थैंक यू’।

आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि धन को लेकर आचार्य चाणक्य के क्या विचार और नीतियां हैं जिन्हें जानकर आप भी सफलता की बुलंदियों को छू सकतेहैं। वीडियो को अंत तक जरूर देखें। दोस्तों यह सही है कि धन ही सबकुछ नहीं होता लेकिन धन से ही सबकुछ पाया जा सकता है। कहते हैं कि धन से आपके जीवन की लगभग 70 प्रतिशत समस्याएं स्वत: ही समाप्त हो जाती है यह अलग बात है कि आप धन के बल पर समस्याएं खड़ी करने में लग जाएं। धन आदमी के जीवन में बहुत महत्व रखता है आइए जानते हैं कि चाणक्य इस संबंध में क्या कहते हैं।

1.धन की बचत-

आचार्य चाणक्य का मानना है कि व्यक्ति को अपने जीवनमें हमेशा धन की बचत करनी चाहिए। धन की बचत करना बहुत ही आवश्यक है। जब भी कभी किसी इंसान के जीवन में मुसीबत आती है तो उस इंसान की बचत की आदत ही उसके काम आती है। इससे पहले की हमारे ऊपर मुसीबतों का अचानक ही पहाड़ टूट पड़े हमें उससे पहले ही सतर्क हो जाना चाहिए।

व्यक्ति के पास जितना भी धन है अगर वह उसकी बचत करताहै तो उसे बुरे वक्त में किसी के सामने हाथ फैलाने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। मगर बचत का मतलब ये नहीं है कि आप को बिलकुल ही अभाव में जीना शुरू कर देना चाहिए।लेकिन आपको अपनी जरूरतों को सीमित करना चाहिए। वो कहावत है न इंसान को चादर देखकर ही अपने पांव पसारने चाहिए। अर्थात इंसान को कभी भी ये नहीं सोचनाचाहिए कि दूसरे के पास हमसे ज्यादा धन है या हमसे ज्यादा सुख सुविधाएं हैं। अगर हम सामने वाले इंसान से अपनी तुलना करेंगे तो हमारे पास उसकी तुलना में जिन सुख सुविधाओं का अभाव है हम उसके ही पीछे पड़ जाएंगे और खुद का ही नुकसान कर बैठेंगे।

गोधन, गजधन, बाजिधन, और रतन धन खान।

जब आवे संतोष धन, सब धन धूरि समान।।

इसका अर्थ है दोस्तों कि हमें कभी भी अपनी तुलना दूसरों से नहीं करनी चाहिए और संतोष रखना चाहिए कि ईश्वर ने हमें जो दिया है हम उनका धन्यवाद करें।

धन से मिलता सम्मान-

धन संपत्ति जीवन का एक महत्वपूर्ण भाग है यह आपको सम्मान दिलाता है और आपको आपदाओं से जुझने में समर्थ बनाता है।

समृद्ध जगह पर रहें-

ऐसे देश या क्षेत्र, जहां पर आपको रोजगार, इज्जत, शुभ चिंतक और शिक्षा न मिले, में रहने का कोई फायदा नहीं है। जहां पर समृद्ध व्यापारी, शिक्षित ब्राह्मण, सैनिक, नदी और चिकित्सक न हो ऐसी जगह पर एक दिन के लिए भी नहीं रुकना चाहिए।

धन से परीक्षा-

अपनी पत्नी की परीक्षा धन-संपत्ति खोने के बाद करें, दोस्त को आवश्यकता के समय, और नौकर को महत्वपूर्ण कार्य देने के बाद परखें। सच्चा पुत्र अपने पिता के प्रति आज्ञाकारी होता है और सच्चा पिता अपने बच्चे का ध्यान रखता है। ईमानदारी सच्चे दोस्त की सही पहचान है।

धन का मोह नहीं-

जो धन बहुत मेहनत के बाद मिले, जिसके लिए अपने धर्म का त्याग करना पड़े, जिसके लिए शत्रुओं की खुशामद करनी पड़े उस धन का मोह नहीं करना चाहिए।

धनवान और मोक्ष

जिस व्यक्ति के पास आस्था, धन और कोई लगाव नहीं होता उसको कभी मोक्ष नहीं मिलता है वह जन्म और मरण के चक्र में फंसा रहता है।

गरीबी एक रोग है-

गरीब और गरीबी के साथ जीवन व्यतीत करना जहर के समान है। अनजानी जगह पर दक्षता सबसे बड़ी मित्र होती है। अच्छे स्वभाव की महिला सच में पुरुष की सबसे अच्छी दोस्त होती है। दवाई बीमार की दोस्त है और दान पुण्य अगले जन्म में काम आता है।

अत्यधिक दान से नुकसान-

अत्यधिक सुंदरता के कारण सीता का अपहरण हुआ, अति घमंड की वजह से रावण मारा गया और अत्यंत दानवीरता की वजह से बाली को बहुत कष्ट हुआ। इसलिए दान हमेशा अपनी सीमा में रहकर करें।

कला, दान-पुण्य ही सबसे बड़ा धन-

ऐसी जगह पर निवास नहीं करना चाहिए जहा पर लोग नियम-कानून से नहीं डरते हैं, चतुर लोग नहीं होते हैं लोगों में दान-पुण्य की भावना की कमी होती है, और जहां पर कला का वास नहीं है।

धन लक्ष्य है तो…

वह व्यक्ति जो अपना लक्ष्य निर्धारित नहीं कर सकता है वह कभी विजयी नहीं हो सकता है। अपनी योजनाओं के बारे में किसी से चर्चा ना करें क्योंकि अन्य लोग आपके कार्य में बाधा पहुंचा सकते हैं। साधारण सा सुझाव है कि आप अपने लक्ष्य का पीछा बगैर किसी के ध्यान की अपेक्षा के करें। धन चाहिए तो अपने कर्मों पर ध्यान केंद्रित करें।

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